आरकेटीए ने ठोकी ईसीसी सोसायटी के चुनावों में ताल,निर्दलीय मोर्चा ने दिया समर्थन

मुम्बई/झांसी।ईसीसी सोसायटी के चुनावों में रेल कर्मचारी ट्रैकमेन एसोसिएशन यानि आरकेटीए के कूदने से लाल झंडे वाली यूनियन के समीकरण बिगड़ सकते हैं।सूत्रों ने रेलवार्ता को बताया कि निर्दलीय मोर्चा भी इनको समर्थन दे सकता है।वहीं रेल के सबसे छोटे कर्मचारियों के इस संगठन के चुनाव में ताल ठोक देने से इतना तय है कि इस बार मेंस यूनियन की पकड़ सोसायटी पर कमजोर हो सकती है।
अपने गठन से लेकर दिनों दिन मान्यता प्राप्त यूनियनों को चुनौती दे रहे ट्रैक मेनों के इस संगठन ने इस बार ईसीसी सोसायटी के चुनावों में अपना पैनल उतार रही है।इसके लिए संग़ठन के मुखिया जी गणेश्वर राव को नामांकन के दिन यहां बुलाने की कोशिस की जा रही है।ऐसा होने से ट्रैक मेनों के बीच जबरदस्त उत्साह जागृत होने की उम्मीद है।
सोसायटी पर अभी तक लाल झंडे वाली यूनियन का ही राज रहा है।दूसरे अन्य संगठनों की कभी इतनी ताकत नहीं रही कि वह इसे ठीक तरह से चुनौती भी दे सकें।सबसे बड़ी बात तो यह रही कि अभी तक ट्रैक मेन मजबूती के साथ लाल झंडे की यूनियन के साथ खड़े रहे।इसी कारण यह यूनियन पैनल वोटों के जरिये अपने उम्मीदवारों को जिताती आई।लेकिन इस बार ऐसा होने की उम्मीद कम है।
लगातार शोषण और वायदा खिलाफी के चलते ट्रैक मेनों ने अब और यूनियनों का साथ देने के बजाए अपना खुद का संगठन खड़ा कर लिया।इनके लगातार संघर्ष के चलते पहली बार इस कैटेगिरी के कर्मचारियों को हार्ड ड्यूटी भत्ता मिल सका।यह बात अलग है कि इनकी जायज मांगों के बीच मे मान्यता प्राप्त संगठन अड़ंगा लगाते आये हैं।फिर भी हार नहीं मानने को यह लोग अडिग हैं।
जहां तक ईसीसी सोसायटी के चुनाव का सवाल है,इस कैटेगिरी के जागने से किसी भी यूनियन की हालत खराब हो सकती है।दरअसल लाल झंडे को छोड़कर किसी भी यूनियन के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।ऐसे में यदि आरकेटीए मजबूती से चुनाव लड़ने में सक्षम रहा तो फिर इस बार फैसला पैनल वोटों के बजाए व्यक्तिगत मतों पर आकर टिक जाएगा।
सूत्रों का दावा है कि आरकेटीए के साथ निर्दलीय मोर्चा के जुड़ जाने से यह और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा।दूसरी और आरकेटीए के नेता लगातार यह कोशिस कर रहे हैं कि अन्य यूनियनों का समर्थन उन्हें मिल सके।इन लोगों का साफ कहना है कि अभी तक वह सभी यूनियनों का साथ देते आएं हैं,एक बार अन्य लोग उन्हें भी समर्थन दें।इतना तय है कि आरकेटीए के मैदान में आने से सभी यूनियनों के समीकरण बुरी तरह से बिगड़ सकते हैं।

 

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  1. RKTA जिंदाबाद, ट्रैकमैन एकता जिंदाबाद

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