इंजन के कैब में छेड़छाड़: ड्राईवरों ने खोला महिला चालकों के खिलाफ मोर्चा

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दावा किया जा रहा है कि रात में ड्यूटी से बचने के लिये महिला चालकों ने जानबूझकर इस कांड को खड़ा किया। सोशल मीडिया पर दिन भर सीनीयर डीई के एक आदेश को शेयर किया जाता रहा जिसमें महिला ड्राईवरों को रात में वर्किंग करने तथा रनिंग रूम में रूकने के आदेश जारी किये गये हैं।

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झांसी। इंजन के कैब में स्पेयर आ रही महिला चालक के साथ कथित छेडख़ानी का मुद्धा अब दूसरा रास्ता अख्तियार करता नजर आ रहा है। जहां खुलासे से अधिकारियों में सन्नाटा पसरा हुआ हैं वहीं कुछ मेल चालकों ने अधिकारियों के साथ मुलाकात कर मामले को झूठा करार दिया है। अधिकारी भी हाथ पर हाथ धरे आज भी बैठे रहे। किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई करने के बजाये मामले को उलझाने में उनका पूरा प्रयास रहा। दूसरी ओर दावा किया जा रहा है कि रात में ड्यूटी से बचने के लिये महिला चालकों ने जानबूझकर इस कांड को खड़ा किया। सोशल मीडिया पर दिन भर सीनीयर डीई के एक आदेश को शेयर किया जाता रहा जिसमें महिला ड्राईवरों को रात में वर्किंग करने तथा रनिंग रूम में रूकने के आदेश जारी किये गये हैं।
बीते दिनों इंजन के कैब में कथित रूप से एक महिला ड्राईवर ने अपने साथ छेड़छाड़ के आरोप ड्राईवर सतविंदर सिंह पर लगाये थे। मामला सामने आने के बाद रेल प्रशासन ने सतविंदर व सहायक चालक भूपेन्द्र को निलम्बित कर जांच करने के आदेश जारी किये। जब यह मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गये। अब इसको दबाने के प्रयास किये जा रहे हैं। वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर आफताब अहमद व सहायक मण्डल विद्युत इंजीनियर महेश गुष्ता के रवैया में आज भी कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिला। सूत्रों ने रेलवार्ता को बताया कि मामले को और ज्यादा आगे नहीं बढ़ाने के लिये महिला चालकों पर कथित रूप से दबाव डाला गया है।
दूसरी ओर कई ड्राईवरों ने रेलवार्ता से बात करते हुये दावा किया कि छेड़छाड़ की कोई घटना नहीं हुई है। यह केवल महिला चालकों का बनाया गया कांड है ताकि उनको रात में ड्यूटी नहीं करनी पड़े। इसके समर्थन में सीनीयर डीई के एक आदेश को उन्होने दिखाया जिसमें महिला चालकों को रात में ड्यूटी करने तथा रनिंग रूम में रूकने के आदेश जारी किये गये थे। इन ड्राईवरों का कहना था कि यदि महिला चालक के साथ छेड़छाड़ हुई है तो वह पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने से पीछे क्यों हट रहीं हैं। उनकी नियत यदि साफ है तो वह इस मामले की तुरेत सम्बधित थाने में रिपोर्ट दर्ज करायें। पुलिस की छानबीन से सारा मामला साफ हो जायेगा।
फिलहाल इतना तो तय है कि जिस प्रकार यह घटना समाने आई उससे अब कोई भी लड़की ट्रेन का ड्राईवर बनने से पहलें एक बार सोचेगी जरूर।

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