सोशल मीडिया में रेलकर्मचारियों द्वारा पूछे जा रहे ऐसे सवाल

एनपीएस,एआईआरएफ की भूख हड़ताल 8 से,कर्मचारी बोले जब लागू हो रही थी तब क्या चूड़ी पहनें बैठे थे..

नई दिल्ली। नई पेंशन योजना को रद्ध करने को लेकर रेलवे का सबसे बड़ा संगठन एआईआरएफ अब 3 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल करने जा रहे है। वहीं दूसरी ओर कई रेल कर्मचारियों ने रेलवार्ता से कहा कि जब नई पेंशन योजना लागू हो रही थी तब यह संगठन क्या हाथ में चूड़ी पहने बैठा हुआ था। अब जब 2019 में मान्यता के चुनाव नजदीक आ गए तब इन्हें एनपीएस याद आ रहा है। इनका कहना है कि पहले ही इस संगठन ने सरकार से मिलकर वेतन आयोग की सिफारिशों पर जिस तरह से कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी की है,ऐसे में इनके किसी भी प्रकार के झांसें में अब हम लोग फंसना नहीं चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ भूख हड़ताल को लेकर एआईआरएफ से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी भी भूख हड़ताल पर बैठने को तैयार नहीं है इन कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि भूख हड़ताल करना ही है तो स्वयं एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा और उनके केंद्रीय पदाधिकारी पहले दिल्ली में रेल भवन के बाहर भूख हड़ताल पर बैठें। कर्मचारियों की आड़ में अब और ज्यादा नाटक हम लोग सहने की स्थिति में नहीं हैं।
गौरतलब है कि नई पेंशन योजना को रद्द करने तथा कई अन्य मांगों को लेकर एआईआरएफ और उससे जुड़े संगठन 3 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल पर कल से बैठने जा रहे हैं। लेकिन जिस प्रकार से इस हड़ताल को लेकर यूनियन के पदाधिकारियों में आपसी सहमति नहीं है उसे देखकर आसानी से कहा जा सकता है कि इस प्रदर्शन का हाल भी पहले जैसे प्रदर्शनों जैसा ना हो जाए। एनपीएस को लेकर पिछले दिनों दिल्ली में किए गए एआईआरएफ के प्रदर्शन से जिस प्रकार कर्मचारियों ने नाता तोड़ा उसे देखकर नहीं लगता है कि इस भूख हड़ताल को भी आम रेल कर्मचारियों का समर्थन मिलेगा।
दरअसल आम रेल कर्मचारी नई पेंशन योजना को रेलवे के अंदर एआईआरएफ की देन मानते हैं। गौरतलब है कि एआईआरएफ के पूर्व अध्यक्ष स्व. उमरावमल पुरोहित स्वयं नई पेंशन योजना के एक ट्रस्टी थे। ऐसे में कहीं ना कहीं कर्मचारियों को मन में यह आम धारणा बन गई है कि नई पेंशन योजना लागू करने मैं एआईआरएफ की सहमति थी। हांलांकि इससे जुड़े पदाधिकारी इस बात का खंडन करते हैं कि नई पेंशन योजना लागू करने में एआईआरएफ का कोई योगदान था। लेकिन कर्मचारी अब इनकी दलीलें सुनना नहीं चाहते, उनका साफ कहना है कि जो काम अब यह लोग कर रहे हैं यह उस वक्त क्यों नहीं किया जब इस योजना को रेलवे में लागू किया जा रहा था। उस वक्त तो इनके अध्यक्ष एनपीएस के ट्रस्टी बनने में अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे थे अब ऐसा क्या हो गया की इनको आंदोलन करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया में जमकर कर्मचारी इस आंदोलन के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। इनका कहना है कि जब कर्मचारी स्वंय जागरूक हो गये तो यह लोग दिखावा करने को खड़े हो गये। वहीं हाल ही में केन्द्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों ने जिस प्रकार से एनपीएस को रद्ध करने के लिये दिन्नी के रामलीला मैदान पर जर्बदस्त प्रर्दशन किया उससे भी कम्रचारी खासे उत्साहित हैं।

 

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6 comments

  1. Shiv Gopal Mishra sarkar ka DALAAL

  2. Very bad

  3. शिव कुमार मिश्रा अपने फायदे के लिए कर्मचारियों को भुख हड़ताल पर जाने का नाटक कर रहा है ताकि वे अपना काम आसानी से करवा सके ।

  4. Surendra kumar

    AiRF dhikkar hai tum par

  5. Nps lagu enhi logo ne karwaya aur ab Natak kar rahe h…Employees ko bewkuf banane ke liye

  6. अब नावटकी करना छोड़ दे मिश्रा जी बहुत ही उल्लू बनाएँ हो रेल कर्मचारियो को,अपना घर काले धन से भरते रहे हो और कर्मचारियो का हक़ अधिकार और भावनाओ से खेलते रहे हो,जिस समय लागु हुआ उश समय कितना माल NDA से खाये थे,चलो मान लिए की आपकी गलती नहीं है पर 2004 की UPA सरकार मे तो लेफ्ट भी भागिदार था स्पीकर सोमनाथ जी थे उस समय चुप क्यु रहे उश समय तो जख्म ताज़ा ताज़ा था उश समय विरोध क्यु नहीं किये। आप नॉटनकी छोड़िये हम सब खुद ही NPS के विरोध करने मे सक्छम है।आप जैसे दलाल की जरूरत नहीं है। एक कहावत है हमारे यहाँ, 70 की दुल्हन 53 का दूल्हा कब तक जलइब अपन झूठ के चूल्हा।

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