झांसी लोकसभा: जिसके दरवाजे आम लोगों के लिए बंद रहे,वह अब उन्ही के सहारे मैदान में

अनुराग शर्मा,प्रत्याशी बीजेपी

झांसी।अनुराग शर्मा को टिकिट देकर कहीं बीजेपी ने आत्मघाती गोल तो नहीं कर लिया।दरअसल उनके टिकट की घोषणा होते ही पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं में जमकर निराश फैल गई।वहीं दूसरी ओर जिस व्यक्ति की कोठी में आम आदमी का प्रवेश निषेध रहा हो वही आदमी अब सड़कों पर घूमघूम कर वोट मांगेगा।
बीजेपी के टिकट की घोषणा होते ही जिस प्रकार का उत्साह पार्टी के समर्थकों में होना चाहिए था,वह कहीं नजर नहीं आया।सभी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि यह टिकट लम्बे दामों में बेचा गया।हालांकि रेलवार्ता इस सम्बंध में कोई दावा नहीं करता लेकिन जिस प्रकार से अफवाहें उड़ रहीं है,उसमे कितनी सच्चाई है,यह तो लेनदेन करने वाले ही जानते हैं।
दरअसल झांसी की सीट को बीजेपी अपने लिए सबसे सुरक्षित मानकर चल रही थी।ऐसे में उम्मीदवार कौन होगा,यह बहुत मायने नही रख रहा था। फिर आपसी गुटबाजी को भी रोकना एक बड़ी चुनौती पार्टी के सामने थी।
अनुराग शर्मा भले बीजेपी के लिए नए हैं,लेकिन वह किसी गुट का प्रतिनिधित्व भी नहीं करते हैं।सबसे बड़ी बात तो यह है कि उनके टिकिट के लिए पूरा जोर यहां से न लगकर आरएसएस के हेडक्वार्टर से लगा था।वहीं से उनको टिकट देने के निर्णय लिया गया।ऐसे में उनका चुनाव प्रबंधन आरएसएस के लोगों के कंधे पर ही होगा।
अनुराग शर्मा की छवि भले निर्विवाद हो,लेकिन उनका सबसे कमजोर पक्ष उनका लोगों से सम्पर्क न के बराबर है।उनकी कोठी के दरवाजे भी हमेशा से आम लोगों के लिए बन्द ही रहे हैं।ऐसे में वह किस प्रकार अपना चुनाव प्रचार करेंगे,वह देखना महत्वपूर्ण है।जहां तक बीजेपी की बात है इतना तय है कि उसके लिए मोदी का नाम ही काफी है।ऐसे में अनुराग की नैया भी इसी नाम के सहारे पार लगने की पूरी सम्भावना है,फिर भी चुनाव हारजीत का खेल है।इसीलिए किसी की भी भविष्यवाणी करना बेमानी है।

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