त्यौहारी सीजन में अवैध वैंडरों से पट गया झांसी का रेलवे स्टेशन

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जिम्मेदार अधिकारी चुप हैं क्योंकि उनको इसके बदले भरपूर नजराना मिलने का सूत्र कर रहे दावा

एक एप में समाया सारा जहां….रेलवार्ता एप।
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झांसी। जैसे-जैसे दीपावली का त्यौहार नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे स्टेशन पर अवैध वैंडरों का जमघट बढऩे लगा है। आम दिनों में जहां इनकी संख्या 200 के आसपास रहती है वहीं त्यौहारों के समय यह बढ़कर 400 से ज्यादा हो जाती है। स्टेशन पर गाड़ी आने के समय खुलेआम यह लोग अवैध रूप से खाद्य सामग्री बेचते हुये दिखते हैं। ऐसे ही अवैध वैंडरों की जब रेलवार्ता की टीम ने पड़ताल की तो कई अवैध वैंडर कैमरा देखकर यहां वहा हो गये। वहीं कई खुलेआम कहते नजर आये कि जो करना हैं कर लो हमारी सेटिंग तो ऊपर तक है। वैंडरों का दुस्साहस देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह खेल कितने संगठित स्तर पर हो रहा है। वहीं इन सब की रोकथाम के लिये तैनात स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन लगता है कि गहरी निंद्रा में हैं।
त्यौहारी सीजन में जब ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती हे तब इन अवैध वैंडरों की मनमानी भी चरम पर पंहुच जाती है। मनमाने दाम और निम्र स्तर का सामान बेचते यह वैंडर आपको स्टेशन पर मक्खियों की तरह गाड़ी आने के समय दिख जायेंगे। लेकिन सबसे बड़ा अचम्भा यह है कि यह उन लोगों को दिखाई नहीं देंगे जिनके ऊपर इनको रोकने की जिम्मेदारी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पूरे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुये हैं यदि रेल प्रशासन चाहे तो एक दिन में ही फुटेज देखकर इन अवैध वैंडरों से स्टेशन को मुक्त करा सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि रेलप्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी आखिर ऐसा चाहेंगे क्यों..। इसके बदले मिलने वाली मोटी कमाई से कोई हाथ नहीं धोना नहीं चाहता हे ऐसे में धड्ड़ले से यह कारोबार जारी है।
जहां तक स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन का सवाल है उनको भी यदि यह अवैध वैंडर नहीं दिख रहे हैं तो इसमें आश्चर्य कैसा। आखिर उनकी भी अपनी निजि जरूरतें हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ खिलवाड़ होता रहे तो इसमें उनका क्या जाता है। एक ओर जहां रेलमंत्री व रेलवे बोर्ड अध्यक्ष रेलवे से भ्रष्टाचार को खत्म करने की कोशिशें में दिन रात लगे हैं वहीं दूसरी ओर अवैध कमाई अधिकारी कैसे कर रहे हैं यह जानना है तो स्टेशन पर एक बार घूम आईये।

 

 

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