पोल खुलने से घबराये शिवगोपाल मिश्रा ने कर्मचारियों को भड़का कर रेलमंत्री पर हमला करवाया!

लखनऊ।अपने यहां बुलाये मेहमान की क्या इज्जत की जाती है ,यह एआईआरएफ के नेताओं ने बता दिया।सच बोलने पर नेताजी ने न सिर्फ कर्मचारियों को भड़काया, बल्कि रेलमंत्री पर जानलेवा हमला करवाने से भी वह पीछे नहीं हटे।दूसरी ओर रेलमंत्री पीयूष गोयल के कार्यालय ने मंत्री के साथ हुई किसी भी प्रकार की झूमाझटकी से इनकार किया है।
दरअसल बहुत लंबे समय से एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा अप्रेंटिस किये हुए युवाओं को झूठी दिलासा दिए हुए थे कि उनको रेलवे में समायोजित करने की बात रेलवे बोर्ड से चल रही है और शीघ्र ही उनके पक्ष में निर्णय लिया जाएगा।उनकी पोल उस वक़्त खुल गई जब नॉर्दन रेलवे मेंस यूनियन के सम्मेलन में मंच से रेलमंत्री ने साफ कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही यूनियन के नेताओं को साफ कर दिया गया है कि किसी भी अप्रेंटिस किये हुए युवाओं को नोकरी देने का सवाल ही नहीं है।रेलमंत्री ने साफ किया कि वह सच बोलना पसन्द करते है और हकीकत यह है कि रेलवे चाह कर भी इनको नोकरी नहीं दे सकती।इस पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है।फिर भी हमने डेढ़ लाख वेकेंसी निकाली और उनमें अप्रेंटिस किये हुए लोगों के लिए सीटें आरक्षित की।रेलमंत्री का साफ कहना था कि यदि हम इनको नोकरी दे देते तो आज कोर्ट में बैठे होते।उन्होंने इस मुद्दे पर यूनियन के ऊपर कर्मचारियों को भड़काने का सीधा आरोप लगा दिया।
अपनी असलियत उजागर होने से एक दफा तो शिवगोपाल मिश्रा हकबका गए।फिर उन्होंने माइक सम्भालते हुए रेलमंत्री के वक्तव्य की कड़ी आलोचना की।उन्होंने कहा कि यूनियन किसी को भड़काती नहीं है।यह रेलकर्मियों का अधिकार है।रेलकर्मियों ने कई आंदोलनों में सीने पर गोली खाई हैं।उन्होंने कर्मचारियों को भड़का दिया।इसके बाद लगभग तीन चार हजार की संख्या में पंडाल में बैठे कर्मचारियों ने रेलमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।कुछ अतिउत्साही कर्मचारी मंच की ओर बड़े।इसके बाद वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने किसी तरह से रेलमंत्री को सम्मेलन स्थल से बाहर निकाला।इस बीच किसी कर्मचारी ने एक गमला उठाकर रेलमंत्री के ऊपर फेंक दिया।बाल बाल बचे रेलमंत्री की जगह यह गमला सुरक्षा बल के जवान को लगा,जिससे वह घायल हो गया।
दरअसल अपनी पोल खुलने से घबराये शिव गोपाल मिश्रा ने कर्मचारियों को गुंडागर्दी करने की खुली आजादी दी।ताकि रेलमंत्री को झुकाया जा सके।अपने कार्यक्रम में मेहमान को बुलाकर जो इज्जत उन्होंने दी,वह उनके लिए बहुत घातक साबित होने जा रही है।सूत्रों का रेलवार्ता से दावा है कि इस घटना का आने वाले दिनों में रेलवे की राजनीति में बहुत गहरा प्रभाव पड़ने से कोई नहीं रोक सकता।फिलहाल गमला फेंकने वालों और ऊधम करने वाले कर्मचारियों की पहचान की जा रही है।इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी करवाई करने का मन रेलवे बना चुकी है।

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2 comments

  1. शिव गोपाल मिश्रा के ऊपर कानूनी कार्रवाई होना बहुत जरूरी है। उन्होने रेल कर्मचारियों की जिंदगी में अंधकार लाने का काम किया है।

  2. यूनियन के नाम पर हिंसा व गुंडागर्दी करने की छूट देना घातक होगा ।असल में श्री मिश्रा बेटे को एमएलए न बन पाने और सौदेबाजी की पोल खुल जाने से बौखला गए है ।

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