मेंस यूनियन के नेताजी सता रहे छोटे से सफाई कर्मचारी को,आवाज़ उठाने पर बुलाया पुलिस को

झांसी।छोटे से सफाई कर्मचारी का शोषण करने में मेंस यूनियन के नेताजी व चिरगांव के एसएस को न तो शर्म आ रही और न ही इनके अंदर मानवता नाम की कोई चीज बची हुई है।काम करवाने के बाबजूद न सिर्फ उसे अनुपस्थित दर्शाया जा रहा है,बल्कि उसके आवेदन पत्र पर भी वह हस्ताक्षर करने से इनकार कर रहे है।जब कुछ लोग इस कर्मचारी की मदद के लिए आगे आये तो नेताजी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।उन्होंने न सिर्फ इन लोगों से बदतमीजी की,बल्कि मन नही भरा तो 100 नम्बर डायल कर लोकल पुलिस को बुला लिया।लेकिन हकीकत सामने आने पर पुलिस न सिर्फ वापस लौट गई बल्कि नेताजी को उचित कार्रवाई करने की हिदायत भी दे गई।यह कोई पहला अवसर नही है जब मेंस यूनियन के पदाधिकारियों पर छोटे कर्मचारियों के शोषण का आरोप लगा है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि जानकारी के बावजूद अधिकारी चुप्पी साधे बैठे रहते हैं।

अपने नेताओं की जी हुजूरी में करने में उन्हें अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने में भी उनको कोई शर्म नहीं आती है।एक छोटे से सफाई कर्मचारी को वह परेशान कर क्या साबित करना चाहते हैं।यह तो पहले से सर्वविदित है कि मेंस यूनियन के लिए छोटे कर्मचारियों की कोई हैसियत नहीं है।अब चिरगांव के एसएस ने साबित कर दिया कि यूं ही नहीं मेंस यूनियन पर छोटे कर्मचारियों के शोषण के आरोप लगते हैं। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि शोषण करने वाले इन लोगों को अधिकारियों का भी खुला संरक्षण मिलता आया है।
चिरगांव स्टेशन पर तैनात सफाई कर्मचारी मेंस यूनियन के नेता और एसएस के कोप भजन का शिकार बना हुआ है।काम करवाने के बाद भी न सिर्फ उसे अनुपस्थित बताया जा रहा है,बल्कि उसके छुट्टी के आवेदन पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं किये जा रहे हैं।दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर इस सफाई कर्मचारी की मदद के लिए जब कुछ लोगों ने आवाज उठाई तो इन नेताजी को जबरदस्त गुस्सा आ गया।उन्होंने मदद करने वालों का न सिर्फ स्टेशन रूम से बाहर जाने को बोला,बल्कि 100 नम्बर डायल कर लोकल पुलिस को भी बुलवा लिया।हालांकि मदद करने वालों के जज्बे के आगे लोकल पुलिस ने किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
दरअसल इन नेताजी की जमीन यहां पर बुरी तरह से खिसक गई है।आगामी ईसीसी डेलीगेट के चुनावों में मेंस यूनियन की नाक बचाने की इनके ऊपर भारी जिम्मेदारी है।लेकिन जिस प्रकार ट्रैक मेनों ने अपनी एसोसिएशन आरकेटीए के तहत इनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है,उससे इनका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ दिख रहा है।
दरअसल चिरगांव यूनिट में ट्रैक मेन जिस तरफ झुक जाएं उस तरफ इस सेक्शन में बाजी पलट जाती है।इस बात का एहसाह इन नेताजी को भी है। ट्रैक मेन अपनी एसोसिएशन के साथ संयुक्त मोर्चा बनाकर पहली बार ईसीसी डेलीगेट का चुनाव लड़ रहे हैं।ऐसे में चिरगांव के एसएस व मेंस यूनियन के नेताजी को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है।
वैसे यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है कि मेंस यूनियन का कोई पदाधिकारी सफाई कर्मचारियों का शोषण कर रहा हो।इससे पहले भी झांसी स्टेशन पर तैनात सफाई निरीक्षक व मेंस यूनियन के कद्दावर नेताजी भी इनका शोषण करने में किसी से पीछे नहीं हैं।
दरअसल मेंस यूनियन के नेताओं की यह मानसिकता रही है कि जो कर्मचारी उनकी गुलामी करने से मना कर देता है उसका शोषण करने में यह लोग जुट जाते हैं।एक छोटे से सफाई कर्मचारी को सता कर यह क्या साबित करना चाहते हैं?इनका दमन करने से क्या यह डेलीगेट के चुनावों में जीत जाएंगे,शायद कभी नहीं।
सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि ऐसे पदाधिकारियों को यहां पर अधिकारियों का खुलेआम संरक्षण हासिल है।इससे न केवल इनका मनोबल बढ़ा रहता है बल्कि यह पूरी तरह से निडर हो जाते हैं।एक ओर जहां रेलवे बोर्ड छोटे कर्मचारियों को मुख्यधारा में लाने के लिए दिन रात एक किये हुए है,वहीं यह लोग उनका शोषण करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं।धन्य है ऐसे नेता और उनकी पालक मेंस यूनियन।

 

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