मेरी बात मानों…रानी बनाकर रखूंगा..विद्युत विभाग में महिला कर्मचारी को शारीरिक शोषण के लिए किया जा रहा मजबूर!

जूही।महिला कर्मचारियों को आज भी किस प्रकार हेय दृष्टि से देखा जाता है इसका जीता जागता उदाहरण यहां वरिष्ठ अनुभाग अभियंता विद्युत कार्यालय में देखने को मिला।हवस के भूखे भेड़ियों को जब शिकार हाथ नहीं लगा तो उन्होंने उसे अपने सीनियर अधिकारियों से उत्पीड़न चालू करवा दिया।हद तो तब हो गई जब पीड़ित महिला का साथ देने के बजाए उसके उत्पीड़न में वह भी साथ हो लिए।तमाम सबूत सामने होने के बाद भी मदद की बजाए जांच का ड्रामा किया जा रहा है।रेलवार्ता के पास उपलब्ध सबूतों/वीडियो में साफ है कि हैवान बना सीनियर कर्मचारी किस प्रकार महिला का शोषण कर रहा है।
जूही में स्थित वरिष्ठ अनुभाग अभियंता विद्युत में सीनियर टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत लक्ष्मी नारायण शर्मा की नियत अपने अधीन कार्यरत एक महिला कर्मचारी के ऊपर आ गई। पहले तो उसने उस कर्मचारी को तरह तरह के झांसे देकर अपने कब्जे में लेना चाहा लेकिन जब वह अपनी कोशिशों में सफल नही हो पाया तो उसने उसका शोषण करना शुरू कर दिया। स्थिति जब हद से गुजर गई तो पीड़ित महिला कर्मचारी ने शर्मा को सबक सिखाने का फैसला किया। उसने सबूत के तौर पर एक वीडियो तैयार किया ताकि शर्मा की हरकतों से पर्दा उठाया जा सके।वीडियो बनाने के बाद वह निश्चित हो गई कि अब शर्मा के खिलाफ कार्रवाई होना निश्चित है। लेकिन उसकी उम्मीदों पर उस वक़्त तुषारापात हो गया जब एसएसई ने वीडियो देखने के बाद उल्टा महिला को ही नसीहत देना शुरू कर दी। रेलवार्ता के पास उपलब्ध ऑडियो रिकार्डिंग में साफ है कि वह कह रहे हैं कि जो लक्ष्मी शर्मा बोले वह करो।जबकि कर्मचारी साफ कह रही है कि उसका बच्चा बहुत छोटा है और वह आउट साइड स्टेशन पर रात में कैसे रुकेगी।मदद करने की बजाए उसे दूसरे दिन अनुपस्थित दर्शा दिया गया।दरअसल नियत में खोट लिए शर्मा उसे अपने साथ आउट साइड स्टेशन पर काम के लिए ले जाता था।इस दौरान वह उसे गलत तरह से छूने की हरसंभव कोशिश करता था।कभी स्टेशन पर जल्दी चलने के लिए उसका गलत तरह से हाथ पकड़ कर खीचना,कभी उसकी कमर में हाथ रखकर जल्दी चलने को कहना,कभी उसके कंधे को इस तरह टच करना कि उसके हाथ छाती तक टच हो जाएं आदि ऐसे कोई हथकंडे नहीं बचे जो उसने इस्तेमाल न किये हों।
शोषण की हद देखिए,आउट साइड स्टेशन पर दिन भर ड्यूटी करने के बाद शर्मा वापसी की गाड़ी के समय छुप जाता था ताकि गाड़ी से लड़की वापस न जा सके। यदि हिम्मत करके वह वापस आ गई तो उल्टी सीधी शिकायत एसएसई से करके वह दूसरे दिन काम करने के बावजूद वह उसकी अनुपस्थित लगवा देता था। जबरन रात में एक महिला को फेलियर सुधारने के लिए आउट साइड स्टेशन पर भेजा जाता था ताकि वह अपने मंसूबों में कामयाब हो सके।जब भुक्त भोगी कर्मचारी ने उसकी गलत नियत के बारे में बताया तब रात में उसको ड्यूटी भेजना बन्द किया गया।अभी भी कार्यालय बन्द होने के बाद शाम 6- 7 बजे दूसरे दिन सुबह काम के लिए केबिल आदि निकालने के बहाने उसे कार्यलय ने बुलाया जाता है।जब इस बारे में उसने शिकायत की तो उसे साफ कर दिया गया कि जो शर्मा कह रहा है वह करो या नोकरी छोड़कर घर बैठ जाओ। यदि लड़की कभी बड़े अधिकारियों को शिकायत करना चाहे तो उसे उल्टा यह कहकर डांटा और अनुपस्थित किया जाता था कि वह कामचोर है और काम नहीं करना चाहती है।दरअसल उक्त महिला कर्मचारी की पीड़ा जानने की बजाए उल्टा उसे ही दोषी ठहराया जाता रहा।कामचोर की उपाधि उसे दे दी गई और बड़े अधिकारियों को यह बता दिया गया कि वह काम नही करना चाहती है इसलिए झूठी झूठी शिकायतें करती घूम रही है।
सूत्रों ने रेलवार्ता को बताया कि बार बार उसे इस बात का अहसास कराया जाता रहा कि वह जाति की चमार है।उसे हमेशा नीचा दिखाने की हरसंभव कोशिश लगातार जारी है। सूत्रों का कहना है कि कार्यालय में पदस्थ लगभग 12 कर्मचारियों में से 8 या 9 सवर्ण जाति के हैं।जो दो चार अन्य जाति के हैं उनमें से कोई भी बड़ी पोस्ट पर नहीं है।ऐसे में जब शोषण की शिकायत उक्त महिला कर्मचारी ने की तो अन्य कर्मचारियों ने उसका साथ देने से साफ इंकार कर दिया। कई जगह शिकायत करने के बाद जब जांच शुरू हुई तो बड़े अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ छोटे कर्मचारियों को साफ जता कि जिसने भी उक्त महिला कर्मचारी के पक्ष में आवाज उठाई वह अंजाम समझ के। जो सच सामने आना चाहिए उसे मजबूरन झूठ में तब्दील किया जा रहा है। तमाम सबूत लिए आंखों में आंसू भरे अपनी इज्जत बचाने के लिए घूम रही इस महिला कर्मचारी की आवाज़ अब भी दवाई जा रही है।आखिर इस देश मे बेटियों को कब न्याय मिलेगा यह देखना है।वैसे जिस प्रकार से रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्विनी लोहानी की महिलाओं के प्रति हमदर्दी है उसे देखकर आसानी से कहा जा सकता है कि इस महिला को जरूर न्याय मिलेगा। जरूरत विभागीय जांच की नहीं बल्कि स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की है ताकि असलियत सामने आ सके।इससे पहले वहां पदस्थ तमाम बड़ों को बाहर ट्रांसफर किया जाना चाहिए ताकि छोटे कर्मचारी बिना डरे अपनी बात कह सकें।

जल्द पढ़िए

भंगी हो भंगी जैसी चप्पल पहनती हो….और खुलासा

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2 comments

  1. Is tarah se aaj nhi hamare samaj me mahilao KO shoshit bona pad rha h

  2. अब रेल अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामले की जाँच CBI से करानी चाहिए। क्योंकि विभागीय जांच के नाम पर बड़े अधिकारी अधिकारी का ही मदद करते हैं। जिसका परिणाम है कि आये दिन कर्मचारियों ने आत्महत्या करना शुरू कर दिया है।

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