शर्मनाक! इंजन के कैब में महिला चालक से मेल ड्राईवर ने की छेड़छाड़

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 महिला लोकोपॉयलेट द्वारा इंजन से कूद जाने की धमकी देने के बाद किसी तरह से वह वहशी डाईवर के चंगुल से मुक्त हो सकी। वहीं दूसरी ओर रेल प्रशासन ने न सिर्फ मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, बल्कि दोषी चालक और सहायक चालक के खिलाफ पुलिस में एएफआई भी दर्ज नहीं कराई। वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर आफताब अहमद व सहायक मण्डल विद्युत इंजीनियर महेश गुष्ता का रवैया बहुत ही निंदनीय रहा। दोनों मामले को दबाने के प्रयास में लगे रहे।इससे भी ज्यादा शर्मनाक कर्मचारी हितों का दावा करने वाली दोनों मान्यता प्राप्त यूनियनों के नेताओं का रूख रहा। किसी ने भी दोषी चालकों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के लिये अधिकारियों पर दबाव नहीं बनाया।

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झांसी। महिलाओं के लिये ट्रेन ड्राईवर की पोस्ट क्या सेफ नहीं है..। बीते दिनों हुये एक वाक्ये ने न केवल इस पर प्रश्र चिन्ह लगाया बल्कि एक शर्मनाक वाक्या भी हुआ, जब इंजन के कैब में एक महिला ड्राईवर के साथ लोको पॉयलेट ने न सिर्फ छेड़छाड़ की बल्कि कथित तौर पर उसके साथ ज्यादती करने का प्रयास किया। महिला लोकोपॉयलेट द्वारा इंजन से कूद जाने की धमकी देने के बाद किसी तरह से वह वहशी डाईवर के चंगुल से मुक्त हो सकी। वहीं दूसरी ओर रेल प्रशासन ने न सिर्फ मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, बल्कि दोषी चालक और सहायक चालक के खिलाफ पुलिस में एएफआई भी दर्ज नहीं कराई। केवल दोनों ड्राईवरों को निलम्बित कर मामले से पल्ला झाड़ लिया है। एक छेड़छाड़ के मामले की रेल प्रशासन किस अधिकार से जांच कर रहा है, यह सोचने का विषय है। जबकि यह मामला सीधे तौर पर पुलिस की जांच का है।
बीते दिनों हुये एक शर्मनाक कांड ने महिला चालकों और पुरूप चालकों के बीच अश्विास की खाई और चौड़ी कर दी। झांसी से बीना पैसिजंर में वर्किंग करके गई महिला चालक ने रात में ही हैडक्वार्टर वापस आने के लिये बीना स्टेशन पर आई लेकिन श्रीधाम एक्सप्रैस 2191 के कोच के दरवाजे नहीं खुलने के कारण उसने ट्रेन के ड्राईवर सतविंदर सिंह से इंजन के कैब में बैठने की अनुमति मांगी। इस पर महिला ड्राईवर को इंजन की पीछे के कैब में बैठा दिया गया। जैसे ही गाड़ी ने बीना छोड़ा ड्राईवर सतविंदर की आखों में शैतानी उतर आई। उसने सबसे पहले इंजन की लाईट बंद करने के लिये सहायक चालक भूपेन्द्र से कहा। इस पर भूपेन्द्र ने लाईट बंद कर दी। जिसका विरोध महिला ड्राईवर ने किया लेकिन दोनों चालकों ने उसकी एक बात भी नहीं सुनीं।
लाईट बंद हो जाने के बाद सतविंदर सिंह ने महिला ड्राईवर से छेडख़ानी आंरम्भ कर दी। इस पर महिला ड्राईवर ने विरोध किया तो सतविंदर वहशी बन गया। और उसके साथ जोर-जर्बददस्ती पर उतारू हो गया। इस दौरान सहायक ड्राईवर भूपेन्द्र चुप रहा। उसने महिला ड्राईवर को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। किसी तरह से महिला ड्राईवर ने सतविंदर के चंगुल को अपने आपको बचाया और इंजन की खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई। सूत्रों ने रेलवार्ता को बताया कि महिला ड्राईवर ने धमकी दी कि यदि अब वह उसके नजदीक आया तो वह खिड़की से कूद कर जान दे देगी। इस पर सतविंदर सिंह के हाथ पैर फूल गये और वह शांत हो गया। गाड़ी के झांसी आते ही महिला ड्राईवर ने चालक लॉबी में अपनी आपबीती बताई। इससे वहां पर सन्नाटा छा गया। महिला चालक द्वारा मामले का खुलासा करने के कारण यहां पर भी सतविंदर सिंह द्वारा उसके साथ दुव्र्यवहार किया गया।
दूसरे दिन महिला चालक ने अपने साथ घटी घटना को लेकर अपनी साथी महिला चालकों के साथ अपने उच्च अधिकारियों से मुलाकात की। इस पर कथित तौर पर सभी को चुप रहने की हिदायत दी गई। लेकिन किसी तरह से मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया।
इतनी बड़ी घटना सामने के बाद भी वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर आफताब अहमद व सहायक मण्डल विद्युत इंजीनियर महेश गुष्ता का रवैया बहुत ही निंदनीय रहा। दोनों मामले को दबाने के प्रयास में लगे रहे। केवल सतविंदर सिंह व सहायक चालक भूपेन्द्र को निलम्बित कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिशें शुरू कर दीं। इससे भी ज्यादा शर्मनाक कर्मचारी हितों का दावा करने वाली दोनों मान्यता प्राप्त यूनियनों के नेताओं का रूख रहा। किसी ने भी दोषी चालकों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के लिये अधिकारियों पर दबाव नहीं बनाया।

 

 

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