स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन को नहीं दिखते अवैध वैंडर!

0
454

ऐसे समय में जब रेलवे संरक्षा के मामले में पिछड़ता जा रहा है तब एक डीओएम को इस पद पर बैठाना पूरी तरह से गलत है।

सूत्रों का दावा है कि स्टेशन पर अवैध वैंडिग का कारोबार करोंड़ों रूपये प्रतिमाह का है। सभी को उसकी हैसियत के अनुसार हिस्सा मिल रहा है। सूत्रों का दावा है कि स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन को भी यदि यह अवैध वैंडर नहीं दिख रहे हैं तब फिर दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली दिख रही है।

एक एप में समाया सारा जहां….रेलवार्ता एप।
अब आप भी जुड़े रहिये रेलवे की खबरों से साथ ही देश-विदेश की अन्य खबरों से। गूगल प्ले स्टोर से मुफ्त में डाऊनलोड कीजिये रेलवार्ता एप। जिसमें आप पायेगें रेलवे की नौकरियों से लेकर अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां। इसके अलावा एप के नीचे दिये गये लिंक के जरिये टिकट बुक करने, पीएनआर चैक करने के अलावा सफर के दौरान अपनी सीट पर गर्मागर्म खाने का आर्डर के अलावा यात्रा के दौरान किसी भी परेशानी से बचने के लिये आप रेलमंत्री को व्टीट भी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप इस एप के जरिये कई अन्य ऐसी जानकारियां पा सकते हैं जो आपको कहीं नहीं मिलेंगी।

झांसी। ना हालत बदले ना ही स्टेशन पर किसी तरह का सुधार हुआ। उल्टे अवैध वैंडिग और ज्यादा बढ़ गई। रेलवे ने बड़े स्टेशनों पर जिस मकसद से स्टेशन डायरेक्टर का पद सृजित किया था वह कहीं पीछे छूट गया। रेलवे बोर्ड द्वारा ए-1 स्टेशनों में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिये स्टेशन निदेशक बैठाना अभी तक पूरी तरह से फ्लाफ साबित होता दिख रहा है। न तो स्टेशन पर अवैध गतिविधियां रूकी और न ही अभी तक कोई सुधार ही दिखाई दिया। यह योजना कितने बड़े स्तर पर फ्लाफ हुई है इसे देशना है तो झांसी स्टेशन पर एक बार घूम आईये। चारों और अवैध वैंण्डरों का मकडज़ाल आपको दिखाई दे जायेगा। साथ ही दिख जायेगी स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन के कथित संरक्षण में चल रहे इस खेल का घिनौना नजारा।
पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु की बेहतरीन योजनाओं में से एक इस योजना का अधिकारियों ने क्या हश्र किया है यह आपको यहां पर आसानी से दिख जायेगा। चारों ओर अवैध वैंण्डरों का झुंड बिना डरे यहां पर आपको खाने से लेकर प्रतिबंधित वस्तुयें तक बेचता हुआ मिल जायेगा। न उन्हे किसी का खौफ है और न ही वह किसी के नजर में आते हैं। आखिर इनकी अवैध गतिविधियों से स्टेशन प्रबंधक और डायरेक्टर गिरीश कंचन कैसे अनिभिज्ञ हैं? सूत्रों का दावा है कि स्टेशन पर अवैध वैंडिग का कारोबार करोंड़ों रूपये प्रतिमाह का है। सभी को उसकी हैसियत के अनुसार हिस्सा मिल रहा है। ऐसे में इन अवैध वैंडरों पर लगाम नहीं लगाई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन को भी यदि यह अवैध वैंडर नहीं दिख रहे हैं तब फिर दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली दिख रही है।
सूत्रों का दावा है कि पहले मण्डल वाणिज्य प्रबंधक के पद पर रहते समय गिरीश कंचन थोड़ा बहुत समय स्टेशन डायरेक्टर के पद के लिये निकाल लेने थे लेकिन जबसे उन्हे मण्डल परिचालन प्रबंधक के पद पर भेजा गया स्टेशन पर सुधार की गतिविधिंया बिल्कुल थम गईं। ऐसे समय में जब रेलवे संरक्षा के मामले में पिछड़ता जा रहा है तब एक डीओएम को इस पद पर बैठाना पूरी तरह से गलत है।

LEAVE A REPLY