आखिर कब तक बहेगी भ्रस्टाचार की गंगा,सर्वेक्षण में फिस्सडी आये झांसी स्टेशन की सफाई व्यवस्था पुनः पुरानी कम्पनी को!

मण्डल के अधिकारियों का खुला संरक्षण है प्राइम क्लीनिंग सर्विस के ऊपर,सर्वेक्षण में फिस्सडी रहे ग्वालियर स्टेशन की सफाई व्यवस्था भी है इसी के हवाले

झांसी।सफाई के मामले में रेलवे बोर्ड द्वारा कराए सर्वेक्षण में नीचे से फिसड्डी साबित हो रहे झांसी स्टेशन की सफाई का ठेका उसी कम्पनी को एक बार फिर से दे दिया गया है जो लगभग पिछले तीन वर्षों से यहां पर सफाई का कार्य कर रही थी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस बार ठेके की राशि मे भी जमकर इजाफा हुआ है लगभग 8 करोड़ रुपये खर्चकर यहां पर सफाई करवाई जाएगी।।वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मियों की भर्ती के नाम पर यहां पदस्थ एक मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक जमकर उगाही कर रहा है।
प्राइम क्लीनिंग सर्विस लखनऊ के ऊपर जमकर मेहरवानी यहां के अधिकारी पिछले तीन वर्षों से लगातार दिखा रहे हैं।दो वर्ष का ठेका पिछले तीन वर्षों से ज्यादा समय से कम्पनी से चलवाया जा रहा है। इस कम्पनी के ऊपर यहां के अधिकारी इतने ज्यादा मेहरवान रहे कि मण्डल के सभी बड़े छोटे स्टेशनों की सफाई के ठेके इसे दे दिए गए।
झांसी के अलावा सफाई में रेलवे बोर्ड के मानकों में फिसड्डी रहे ग्वालियर के स्टेशन की सफाई का भी ठेका इसी कम्पनी के पास है। इसके ऊपर अधिकारियों की किस तरह मेहरवानी रही वह इन आंकड़ों में आसानी से समझ मे आ सकता है। कम्पनी को 20 अक्टूबर 2015 से 19 अक्टूबर 17 तक सात लाख 39 हजार 900 रुपये प्रति महीने की दर से दो वर्ष का ठेका दिया गया था।इसके बाद बिना किसी प्रकार की अन्य को सूचना दिए बगैर ठेका खत्म होने के दूसरे दिन से पुनः एक बार इसे उसी दर पर अगले तीन माह के लिए काम सौप दिया गया। फिर तीन माह बाद एक बार पुनः तीन माह के लिए इसे पुरानी दर पर ही काम दे दिया गया। हद तो तब हो गई जब 9 माह तक सीनियर डीसीएम ठेका नहीं करवा पाए। एक बार फिर इसी कम्पनी को कुटेशन के आधार पर काम दे दिया गया। यह तब हुआ जब पहले ही दिन से कम्पनी ने ठेका लेकर स्थानीय छोटे से ठेकेदार को काम सौंप दिया।मशीनीकृत सफाई के इस ठेके में मशीनें केवल उस दिन चलीं जिस दिन किसी बड़े अधिकारी का निरीक्षण आदि हुआ।इस बात की तस्दीक स्टेशन पर लगे कैमरों से भी की जा सकती है। दरअसल इस कम्पनी को यहां पर खुला संरक्षण दिया गया। झांसी स्टेशन का ठेका होते ही अन्य बड़े व छोटे स्टेशनों की सफाई भी इसे ही सौंप दी गई। ग्वालियर स्टेशन की सफाई भी इसी कम्पनी के पास है जिसे साफ सफाई में झांसी की तरह फिसड्डी का तमगा हासिल हुआ है।
भ्रस्टाचार की परकाष्ठा को पार करते हुए इसी कम्पनी को 19 जुलाई 2017 से अभी तक कुटेशन के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान लगातार किया जा रहा है। जबकि नियमानुसार किसी काम को ज्यादा से ज्यादा तीन बार कुटेशन के आधार पर ही काम दिया जा सकता है।सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि इस अंधेरगर्दी में यहां का लेखाविभाग भी आंखें बन्द करके लगातार कुटेशन के आधार पर राशि जारी करता रहा। यह तब जब रेलवे बोर्ड के सर्वेक्षण में झांसी स्टेशन की साफ सफाई व्यवस्था स्तरहीन पाई गई। फिसड्डी स्टेशनों में शुमार की गई स्टेशन की साफ सफाई के बावजूद एक बार इसी कम्पनी के ऊपर अधिकारियों की मेहरबानी हुई है।सूत्रों ने रेलवार्ता को बताया कि एक बार पुनः इसी कम्पनी को लगभग 8 करोड़ रुपये का ठेका देने की तैयारियां पूरी हों गईं है।
आखिर कब तक यहां के अधिकारियों द्वारा इस तरह से खुलेआम भ्रस्टाचार की गंगा बहाई जाती रहेगी। एक तरफ जहां रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान में रेलवे को अगुआ बनाने के लिए दिनरात एक किये हुए हैं वहीं यहां पर इससे लगातार खिलवाड़ किये हुए हैं।
दूसरी ओर कम्पनी को ठेका मिलने की गारंटी होते ही यहां पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती करने में जमकर लूटखसोट की जा रही है। पक्की नोकरी का झांसा देकर बेरोजगार लोगों से वसूली करने की चर्चा आम हो गई है।

24Shares

Check Also

एनपीएस को लेकर सरकारी घोषणा से युवाओं में नाराजगी,सभी दल जिम्मेदार है इसे लागू करने में

एनपीएस को रद्द कराने के लिए संघर्ष कर रहे सूरवीर आज आये दिन उन नेताओं …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *