एक बार फिर आर एन की सरकार,रेलवार्ता की भविष्यवाणी हुई सच

झांसी। मेंस यूनियन के त्रिवार्षिक अधिवेशन में चुनाव का ड्रामा पूरा हो गया। जैसा कि रेलवार्ता ने बताया था ठीक वैसा ही हुआ। एक बार फिर आर एन यादव की ताजपोशी मण्डलमंत्री के पद पर हो गई। एक दो को छोड़कर बाकी पूरी पुरानी टीम को रिपीट कर दिया गया। चुनाव पर कई रेलकर्मियों ने कहा कि उन्हें पहले से ही पता था कि महामंत्री आर डी यादव के रहते आर एन यादव को हटाना दूर उनके सामने कोई चुनाव लडऩे की इच्छा तक जाहिर नहीं कर सकता। वहीं दूसरी ओर एक आश्चर्यजनक कदम के तौर पर मण्डल में भी सेवानिवृत्त लोगों का रास्ता साफ हो गया।
आर एन यादव का मेंस यूनियन में कितना दबदबा है वह इससे ही जाहिर हो जाता है कि चुनाव लडऩा तो दूर चुनाव लडऩे की बात भी कोई नहीं कर सकता है। ऐसा ही आज देखने को मिला। पहले से तय मंडल की टीम को केवल अनुमोदन के लिए रखा गया जिसे मंजूर कर लिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है जब चुनाव होना ही नहीं थे तब फिर इतना तामझाम क्यों फैलाया गया। कई कर्मचारियों को स्पेशल लीव दी गई तो कई अपने ड्यूटी छोड़कर अधिवेशन में गए।
वहीं दूसरी ओर रेलवार्ता ने पहले ही साफ कर दिया था की अधिवेशन में कुछ होना जाना नहीं है। आर एन यादव अपने पद पर बने रहेंगे ठीक हुआ भी। वहीं इस बार रेलवे अस्पताल को मंडल की टीम में 2 स्थान मिले है। जहां पहले से चीफ मैट्रन आईलिन लाल सहायक सचिव थीं इस बार नीरज उपाध्याय को मंडल उपाध्यक्ष बनाया गया है। जहां तक नीरज की ताजपोशी का सवाल है तो इसमें भी मंडल मंत्री ने बड़ा खेल किया है। गौरतलब है कि नीरज उपाध्याय की दावेदारी शाखा नम्बर एक के सचिव के पद पर थी। वहीं इस पद पर मंडल मंत्री अपने सजातीय को बैठाना चाहते हैं। नीरज उपाध्याय उसमें एक बड़ा रोड़ा थे। अब नीरज को मंडल उपाध्यक्ष बनाने से उनकी दावेदारी स्वत: खत्म हो गई है।
गौरतलब है कि नीरज उपाध्याय पूर्व में भी मेंस यूनियन की शाखा नंबर 1 के सचिव रह चुके हैं। तब भी मंडल मंत्री आर एन यादव के विरोध के कारण उन्होंने मेंस यूनियन छोड़कर एनसीआरईएस को ज्वाइन कर लिया था लेकिन वहां पर भी उनका मन नहीं लगा और वह वापस मेंस यूनियन में आ गए थे। अब उन्हें उपाध्यक्ष बनाकर आर एन यादव ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। अब 12 अप्रैल को प्रस्तावित शाखा नंबर 1 के चुनाव में वह अपने मनपसंद व्यक्ति को शाखा नंबर 1 की कमान सौंपने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं।
वहीं दूसरी तरफ सूत्रों का दावा है कि शाखा नंबर 1 के चुनाव में आर एन यादव के सामने जातिवाद और जनाधार दोनों में से एक को चुनने का अवसर है। देखते हैं कि शाखा नंबर 1 की कमान किसके हाथ में जाती है। जहां तक वर्तमान शाखा सचिव जय सिंह का सवाल है वह अभी तक पूरी तरह से एक नेता के रूप में कामयाब रहे हैं लेकिन अस्पताल के कुछ चुनिंदा लोगों की एकला चलो नीति के कारण वह ऐसे लोगों को आगे आने से नहीं रोक पायें हैं जो यूनियन की आड़ में वसूली करने के लिये कुख्यात हैं। अब ऐसे ही लोग एक बार पदाधिकारी बनने की दौड़ में सिर्फ इसलिये आगे हैं कि वह भले कर्मचारियों के बीच में अलोकप्रिय हों लेकिन मण्डल मंत्री के लिये खबरीलाल बनने के कारण उनका दावा दूसरों से कहीं ज्यादा मजबूत है।

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