भूखे रहकर ड्यूटी करेंगे देश भर के हजारों स्टेशन मास्टर

नईदिल्ली,झांसी,जबलपुर। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले काफी समय से आंदोलित देश भर के रेलवे स्टेशन मास्टर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गये हैं। रेल मंत्रालय का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कराने के लिए आल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के तत्तावधान में आगामी 11 अगस्त को भारतीय रेलवे के लगभग 35 हजार स्टेशन मास्टर भूखे रहकर नौकरी करेंगे। उत्तर मध्य व पश्चिम मध्य रेलवे में भी इस आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। स्टेेशन मास्टर के इस आंदोलन को कहीं कहीं यूनियनों ने भी समर्थन दिया है।इससे आंदोलन को और गति मिल गई है।कुछ समय पूर्व देशभर में रनिंग कर्मचारियों ने भी भूखे रहकर गाड़ियां चलाईं थी।उनके आंदोलन से सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा था।अब इसका कितना असर पड़ेगा यह देखना बाकी है।

आंदोलित स्टेशन मास्टर 11 अगस्त को भूख हड़ताल में रहकर ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे। स्टेशन मास्टर रेलवे का अहम हिस्सा माने जाते हैं। उन्हें रेलवे का ब्रांड एम्बेसडर कहा जाता है। रेल यातायात में व सभी कामों में वे विभिन्न विभागों के केंद्र बिंदु होते हैं। जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों के स्टेशनों में वे भलीभांति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। इसके बाद भी रेलवे उनकी मांगों को लेकर कभी विचार नहीं करती है। रेल प्रशासन के इसी रवैए से परेशान होकर उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। आल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के पमरे के जबलपुर मंडल के पदाधिकारी मंडल अध्यक्ष एल पी कुशवाहा जी मंडल सचिव एआर पाल, पीके दुबे, बलवंत बजेठा आलोक कुमार सिन्हा, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं समस्त स्टेशन मास्टरों से आव्हान किया है कि वे इस आंदोलन में अपनी पूरी भागीदारी निभाएं और भूखे रहकर ड्यूटी करें, ताकि सरकार को शर्म आए और वे उनकी मांगों को हल करने गंभीर हों.

इसी सम्बंध में बीते दिनों झांसी में भी स्टेशन मास्टरों के प्रतिनिधियों ने पत्रकार वार्ता कर सरकार के समक्ष अपनी मांगे रखीं। आर के शर्मा का रेलवार्ता से कहना था कि उनकी जायज मांगों को भी सरकार अनसुनी कर रही है।
स्टेशन मास्टरों की यह है मांग
एमएसीपी से मिलने वाला तीसरा प्रमोशन (ग्रेड पे 5400) दिया जाए।
– देशभर में कई ऐसे स्टेशन हैं, जहां स्टेशन मास्टरों को हर रोज 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे ड्यूटी रोस्टर तत्काल रद्द किया जाए।
– स्टेशन मास्टर ट्रेनों को चलाने का काम करते हैं। इस दौरान संरक्षा व तनाव का सामना भी करना पड़ता है। उन्हेें संरक्षा व तनाव भत्ता दिया जाए।
– स्टेशन मास्टरों की पूरी संख्या में से 15 प्रतिशत पद राजपत्रित स्टेशन मास्टर के रूप में सृजित किए जाएं।
– जिन स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या बहुत है, ऐसे स्टेशनों पर सहयोग के लिए एक सहकर्मी स्टेशन मास्टर की नियुक्ति की जाए।
– स्टेशन मास्टर जिन-जिन विभाग के कर्मचारियों का प्रमुख कहलाता है, स्टेशन मास्टरों का वेतनमान उनसे ज्यादा होना चाहिए।
– जिन स्टेशनों के आसपास मेडिकल या शैक्षणिक सुविधाएं नहीं है, वहां स्टेशन मास्टर के परिवारों के नजदीक शहर में आवास की व्यवस्था की जाए।
– स्टेशन में रेस्ट रूम की व्यवस्था की जाए।
– स्टेशन डायरेक्टर का पद अनुभवी तथा सीनियर स्टेशन मास्टरों को दिया जाए।
– नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाए।

हाल ही रनिंग कर्मचारियों ने भी भूखे रहकर गाड़िया चलाईं थी। इस दौरान सूने पड़े रहे रनिंग रूम के मैस उनकी सफलता की कहानी खुद कहते रहे।लेकिन सरकार के ऊपर इस आंदोलन का कोई असर नहीं पड़ा।अब स्टेशन मास्टरों के आंदोलन का कितना असर पड़ेगा वह देखना है।

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