यूनियनों की कमाई का बड़ा अड्डा बना रेलवे हॉस्पिटल,चहेतों को कमाई की जगह पोस्टिंग कराने के लिए जोड़तोड़

एक बड़े नेताजी ने लाखों का सौदा कर सम्बंधित कर्मचारी को अनफिट कराने के लिए मेडिकल बोर्ड पर दवाब बनाया।बिना दवाब में आये बोर्ड ने उक्त कर्मचारी को अनफिट करने से साफ मना कर दिया।इसके बाद मण्डल के बड़े अधिकारी के जरिये डॉक्टर के ऊपर दवाब बनवाया गया। यहां से बात नहीं बनी तो जोनल मुख्यालय के अधिकारियों पर दवाब बना कर वहीं पर दुबारा मेडिकल बोर्ड बनवाया गया।यहां पर भी पांच डॉक्टरों की टीम ने उक्त कर्मचारी को फिट घोषित कर दिया।इसके बाद भी नेताजी ने हिम्मत नही हारी।

इलाहाबाद/झांसी। जिन नेताओं से कर्मचारियों को अपने भले करने की उम्मीद होती है वही भला करना तो छोड़िए आजकल यह लोग कौन सा स्टाफ कहां पर कार्य करेगा,उसकी सेटिंग में दिनभर लगे रहते हैं।दरअसल इनकी मंशा इसके पीछे कर्मचारियों का भला करने की बजाए अपने दलालों को चैम्बर में ड्यूटी लगवाने की होती है ताकि दलाली की रकम का हिस्सा इनको भी मिलता रहे।अमूनन यह सभी विभागों में हो रहा है लेकिन फिलहाल रेलवे हॉस्पिटल में ऐसे नेताओं का आप दिन भर जमघट देख सकते हैं जो अपने दलालों को यहां वहां पोस्ट करने के लिए अस्पताल प्रशासन पर दवाब बनाते रहते हैं। साथ ही यूनियन कार्यालयों में कौन को अनफिट कराना है कौन को डीकेटराइज करवाना है इसका सौदा भी बड़ी लेनदेन करके किया जा रहा है।
रेलवे अस्पताल वर्तमान में यूनियनों के नेताओं की कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है।अपने दलालों को ऐसी सीटों पर बैठने के लिये यह लोग आए दिन दवाब बनाते हुए देखे जा सकते हैं।कुछ ऐसे लोगों का इनके ऊपर वरदहस्त है जो अवैध कमाई में वर्षों से लगे हुए हैं।
अभी तक तो यूनियन के कुछ बड़े नेता जमकर कर्मचारियों को मेडिकल डीकेटराइज/अनफिट कराने में दिन रात एक किये हुए थे लेकिन हद तो तब हो गई जब सबसे छोटे स्तर के कर्मचारियों की ड्यूटी में इन लोगों ने सीधे दखल देना शुरू कर दिया। कौन सा कर्मचारी कौन से डॉक्टर के चैम्बर में काम करेगा कौन सा नहीं अब यही काम इनके पास बचा है।
दरअसल काफी लम्बे समय से अपने चहेतों को ऐसी सीटों पर बैठाने के लिए दोनों यूनियन के नेताओं में आपसी जोरआजमाइश होती रही है,जहां पर अवैध कमाई की जाती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यदि सम्बंधित कर्मचारी रिश्वत लेते जगजाहिर भी हो जाता है तो ऐसे कर्मचारियों को बचाने के लिए यह नेता एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। दोनों यूनियन में इस बात की होड़ लगी हुई है कि उनके समर्थकों को कैसे भी कमाई की जगह दिला दी जाए।
ऐसा नहीं है कि अस्पताल प्रशासन आँखे मूंद कर इन दोनों यूनियन के नेताओं की बात मान रहा है।कई बार ऐसा भी हुआ कि यूनियन के बड़े नेताओं के दवाब को सीधे नकार दिया गया।हाल ही में एक ऐसा मेडिकल बोर्ड सामने आया जिसमें एक बड़े नेताजी ने लाखों का सौदा कर सम्बंधित कर्मचारी को अनफिट कराने के लिए मेडिकल बोर्ड पर दवाब बनाया।बिना दवाब में आये बोर्ड ने उक्त कर्मचारी को अनफिट करने से साफ मना कर दिया।इसके बाद मण्डल के बड़े अधिकारी के जरिये डॉक्टर के ऊपर दवाब बनवाया गया। यहां से बात नहीं बनी तो जोनल मुख्यालय के अधिकारियों पर दवाब बना कर वहीं पर दुबारा मेडिकल बोर्ड बनवाया गया।यहां पर भी पांच डॉक्टरों की टीम ने उक्त कर्मचारी को फिट घोषित कर दिया।इसके बाद भी नेताजी ने हिम्मत नही हारी।इसको लेकर विजिलेंस के यहां दस्तक दी गई। वहां से दवाब बनाने के लिए कुछ के खिलाफ गलत तरीके से करवाई करवाई गई।फिर भी डॉक्टर अड़े रहे। लेकिन विजिलेंस के जरिये तीसरी बार मेडिकल बोर्ड बनाने की कोशिशें की गईं जबकि मेडिकल मैन्युल के अनुसार तीसरी बार किसी कर्मचारी का मेडिकल बोर्ड नहीं किया जा सकता।फिर भी नेताजी लगातार दवाब बनाये हुए हैं। दरअसल सूत्रों का कहना है कि उक्त कर्मचारी को अनफिट करवाने के लिए यहां पर बड़े स्तर पर लेनदेन किया गया है।इस लेनदेन में मण्डल रेल प्रबंधक कार्यालय में तैनात एक कुख्यात कर्मचारी की भी सीधी संलिप्तता है।
दरअसल काफी समय के बाद अस्पताल में एक बेहद ईमानदार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यरत हैं।लेकिन उनको भी आये दिन नेताओं की फरमाइश सुननी पड़ रहीं है।अस्पताल की जरूरतों की ओर किसी भी यूनियन का ध्यान नहीं है। सब अपनी जुगाड़ में लगे हुए हैं।

 

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