रेलवार्ता की खबर से जागे वर्कशॉप प्रशासन ने मशीन के उदघाट्न पर रोक लगाई,मेंस यूनियन को दिखाया आईना

  1. झांसी।कर्मचारियों के रुपयों से खरीदी गई रोटी मेकर मशीन को मेंस यूनियन द्वारा निजी सम्पत्ति बताने तथा उसका क्रेडिट लेने के घिनोने प्रयास पर वर्कशॉप प्रशासन ने पानी फेर दिया है। साफ चेतावनी दी गई है कि प्रशासनिक कार्य मे हस्तक्षेप यूनियन से सम्बंध बिगाड़ सकती है।दरअसल रेलवार्ता द्वारा इस संबंध में भंडाफोड़ करने के बाद अधिकारियों की नींद खुल गई थी।
    रेलकर्मचारियों की खून पसीने की कमाई को ईसीसी सोसायटी किस तरह बर्बाद कर रही है रोटी मेकर मशीन इसका छोटा सा उदाहरण भर है। मशीन को खरीदने के लिए ईसीसी सोसायटी की किस बैठक में प्रस्ताव पास किया गया,इसको खरीदने के लिए किस पेपर में टैंडर/कुटेशन निकाली गई,यह किसी को भी नहीं पता है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिस प्रकार से मशीन को लेकर नेताजी का महिमामंडन किया गया उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है।
    वहीं दूसरी ओर रेलवार्ता में खबर प्रकाशित होने के बाद वर्कशॉप प्रशासन की नींद खुल गई। यूनियन को पत्र लिखकर बता दिया गया कि एक बार मशीन को भेंट करने के बाद यह वर्कशॉप प्रशासन की संपत्ति हो गई। चूंकि कैंटीन को प्रशासन संचालित करता है ऐसे में अब वह ही इसके बारे में कोई निर्णय करेगा। यूनियन को साफ कर दिया गया है कि वह प्रशासन के काम मे हस्तक्षेप नहीं करे ताकि औधोगिक सम्बंध बने रहें।
    गौरतलब है कि रेलकर्मचारियों के रुपयों को सोसायटी के माध्यम से हमेशा से ही यूनियन अपनी छवि चमकाती आई है वहीं नेताओं के बच्चों की बेरोजगारी दूर करती आई है।धन्य है वर्कशॉप प्रशासन, जो शायद अब जाग गया और रेलकर्मचारियों कि कमाई से खरीदी गई मशीन से यूनियन की वाहवाही करने से रोक दिया।
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