रेलवे बोर्ड का कारनामा, wcr में बगैर पदोन्नति बनाया एडीआरएम

जबलपुर. पिछले दिनों रेलवे बोर्ड द्वारा पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के सचिव (सेक्रेट्री) को जबलपुर मंडल में एडीआरएम बनाने का जो आदेश दिया है, उसे जानकार नियम विरुद्ध बता रहे हैं. बताया जाता है कि जीएम के सचिव जो अभी जेएजी (जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) के अफसर हैं, उन्हें एसएजी की पदोन्नति नहीं मिली है, उसके बावजूद उन्हें जबलपुर में एडीआरएम के पद पर नियुक्ति का आदेश दिया गया है.

वहीं इस मामले में पमरे मुख्यालय में खींचतान शुरू हो गई है, क्योंकि वर्तमान एडीआरएम का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है, वहीं जीएम सेक्रेट्री जिनका तबादला पूर्व में कपूरथला हुआ था, उसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं.

बताया जाता है कि पमरे के जीएम के सेक्रेट्री सुधीर सरवरिया का तबाादला पिछले दिनों रेलवे बोर्ड ने एक आदेश में जबलपुर मंडल का अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक के पद पर तबादला का आदेश जारी किया, किंतु आश्चर्य की बात है कि उन्हें वर्तमान एडीआरएम दिनेश चंद्र के स्थान पर स्थानांतरित किया गया, किंतु श्री चंद्र की पोस्टिंग कहां की गई, इसको लेकर कोई आदेश नहीं दिया गया.

एसएजी मिला, नहीं तो एडीआरएम के पद पर पदोन्नति क्यों

सूत्रों के मुताबिक पमरे मुख्यालय में कई वरिष्ठ अधिकारी इस बात पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि जब किसी अधिकारी को एसएजी नहीं मिला तो उसे उस एडीआरएम के पद पर पदोन्नति कैसे दी जा सकती है. इतना जरूर है कि श्री सरवरिया को नॉन फंक्शनल एसएजी मिला है, इस नॉन फंक्शनल एसएजी में सभी प्रकार के आर्थिक लाभ तो मिलता है, किंतु एसएजी की पावर नहीं मिलती. यह पावर तभी मिलती है, जब एसएजी मिल जाए, लेकिन यहां पर रेलवे बोर्ड ने उपकृत करते हुए एसएजी में पदोन्नति हुए बगैर एडीआरएम जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति कर दी है.

दरअसल जानकार एडीआरएम जैसे महत्वपूर्ण पद के पीछे की कहानी कुछ और ही बता रहे हैं. दरअसल रेलवे बोर्ड का आदेश है कि यदि किसी अधिकारी का तबादला हो जाता है तो उसे 15 दिन के भीतर उस स्थान के लिए रिलीव कर दिया जाना चाहिए, यदि कोई अधिकारी रिलीव नहीं होता है तो उसका वेतन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाता है.

यहां पर यही कारण महत्वपूर्ण रहा. जीएम के सचिव सुधीर सरवरिया का तबादला कपूरथला डेढ़ माह पहले ही हो गया था, किंतु वे जबलपुर से रिलीव नहीं हुए, जबकि रेलवे बोर्ड का स्पष्ट आदेश है कि 15 दिन के भीतर स्थानांतरित अधिकारी को जिस स्थान पर उसका तबादला किया गया है, वहां के लिए रिलीव होना होगा, नहीं तो उसका वेतन बंद कर दिया जाए.

बताया जाता है कि इस मामले को पमरे के मुख्य कार्मिक अधिकारी ने काफी गंभीरता से लेते हुए डिप्टी सीपीओ (राजपत्रित) को एक विभागीय गोपनीय पत्र लिखा, जिसमें जीएम सचिव के रिलीव नहीं होने की स्थिति में उनका वेतन बंद करने को कहा, लेकिन यह गोपनीय पत्र कहीं से लीक हो गया, जिसके बाद डिप्टी सीपीओ की ओर से यह जानकारी लीक हो गई, जिसके बाद वेतन न कटे, इसके लिए रेलवे बोर्ड तक फील्ड जमाई जाने लगी और उसमें सफलता भी मिल गई, जो एडीआरएम के रूप में नियुक्ति के रूप में सामने आयी. अब यह बात अलग है कि आने वाले दिनों में श्री सरवरिया को एसएजी ग्रेड मिल जायेगा, लेकिन आज की तारीख तक उन्हें एसएजी नहीं मिला, किंतु उनका तबादला आदेश एडीआरएम की पोस्ट के लिए आ चुका है.

पमरे सूत्रों के मुताबिक इस मामले को सीपीओ जीएल मीणा ने काफी गंभीरता से लिया है औैर डिप्टी सीपीओ (राजपत्रित) डीपी गुप्ता को लिखे गोपनीय पत्र के लीक होने की घटना पर कड़़ा रुख अख्तियार करते हुए डिप्टी सीपीओ श्री गुप्ता को एक और गोपनीय पत्र लिख दिया है, जिसमें पत्र के लीक होने का कारण पूछा गया है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पमरे में उच्च अधिकारियों की बीच चल रही इस खींचतान में कई और नये मोड़ आएंगे.

माना जा रहा है कि पमरे के एक-दो विभाग प्रमुखों को छोड़ दिया जाए तो आधा दर्जन से ज्यादा विभाग प्रमुख जीएम के सचिव को किसी भी प्रकार पटखनी देेने या कहें निपटाने की तैयारी में लगे हैं, जो पिछले महाप्रबंधक रहे गिरीश पिल्लई के कार्यकाल के दौरान ही उनके सचिव से काफी नाराज थे, लेकिन उस वक्त वे कुछ कर नहीं पा रहे थे, लेकिन श्री पिल्लई के यहां से जाते ही ऐसे विभाग प्रमुख (पीएचओडी) ज्यादा सक्रिय हो गये हैं और आर-पार की जंग में लगे हैं.

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