शिवगोपाल मिश्रा की धमकी,मेरे बारे में सोशल मीडिया में कुछ कहा तो दर्ज होगा मुकदमा!

नईदिल्ली।अपने खिलाफ सोशल मीडिया में चल रहे अभियान से एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा परेशान हो गए हैं
उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर साफ चेतावनी दी है कि आगे से इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ साइबर अपराध के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से भी ऐसे लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करवाने को कहा है।वहीं दूसरी ओर कई रेलकर्मियों ने रेलवार्ता से कहा कि किसी के भी खिलाफ मामला दर्ज होता है तो वह लोग भी कर्मचारियों को गुमराह करने के कारण इनके खिलाफ मामला दर्ज करवाने से पीछे नहीं हटेंगे।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर जिस तरह से रेलवे के दोनों फेडरेशनों ने सरकार के आगे घुटने टेके, उससे कर्मचारी काफी आक्रोशित हैं। खासकर एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा कर्मचारियों के निशाने पर सबसे ज्यादा हैं। दरअसल कर्मचारियों को सबसे ज्यादा भरोसा आज भी इसी संघठन पर है। इसी कारण इसके नेताओं के खिलाफ रोष भी सबसे ज्यादा है। सोशल मीडिया में आये दिन शिवगोपाल मिश्रा के बारे में उल्टे सीधे बयान पड़ने को मिल जाते हैं।
पानी जब सर से ऊपर निकलने लगा तब इसके नेताओं को चिंता होने लगी। छोटे से छोटा कर्मचारी आज जिस तरह से इसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बयानबाज़ी कर रहा है उसे देखकर आगामी मान्यता के चुनावों में इस संघठन को भारी नुकसान होने की संभावनाएं दिखने लगीं हैं। ऐसी ही बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए अब इनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।
हालांकि कई कर्मचारियों ने रेलवार्ता से कहा कि वह इन गीदड़ भवकियों से नहीं डरते हैं। आज इन्ही नेताओं के कारण कर्मचारियों को लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। इसके बावजूद नेताजी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के बजाए फालतू की भाषणबाजी करते घूम रहे हैं। चुनाव नजदीक आते देख 14 वर्षों बाद उन्हें एनपीएस की याद आ रही है। सरकार आये दिन कर्मचारी विरोधी निर्णय लेती जा रही है लेकिन नेताजी आंदोलन करने के बजाए अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने की धमकी दे रहें हैं।

पाठकों से

रेलवे में आप क्या सेवानिवृत्त नेताओं को चाहते हैं? अपना मत जरूर दें। रेलवार्ता का ऑन लाईन पोल चालू है। आप अपनी पसंद के बारे में वोट जरूर कीजिए। आपके द्वारा दिये गये वोट के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा। आपका वोट शायद रेलवे की हालत बदलने में कामयाब हो जाये। तो देर किस बात की है कीजिये वोट और बदलिए रेलवे को।

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7 comments

  1. No Retied Employee is not good For Railway union

  2. रविशंकर कुमार

    सेवानिवृत रेलकर्मी को नेता के रूप मे रेल कोई जगह नहीं मिलना चाहिए।

  3. Nahin ! Retired person ko koi haq nahin h karmchariyon ka netritwa karna….

  4. Durgadas Malajpure

    आप तो खुद ही अपने समर्थकों के साथ धमकी दे रहे है ,वैसे सेवा निवर्ति के बाद आखिर आपने रेल के किस उपक्रमो को बचाया हुआ है,आखिर रेल स्टेशन आपकी निगरानी में कैसे बिक रहे है ,निरन्तर रेलव से कर्मचारियों की कमियां क्यों हो रही है । इन सबकी जिम्मेदारी रोकने की क्या आपकी नही है ।
    जय हिंद,

  5. कर्मचारी को धमकी देने से क्या होगा
    यदि अपने निजी स्वार्थ छोङकर रेल प्रसाशन को धमकी देते,सरकार क धमकी देते, तो समझ आता की आप क्या हैं

  6. कर्मचारियों के पैसा से कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा लड़ना किस हद तक सही है? आपको एक नेता के तौर पर ये बात शोभा नहीं देता है। नेता तो जनता/कर्मचारियों के समस्या का समाधान करने के लिए होती है न कि उल्टा जनता के ऊपर मुकदमा दर्ज करे।

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