सरल मासिक रिटर्न को GST परिषद ने दी मंजूरी

नयी दिल्ली। माल व सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने डिजिटल माध्यम खरीदारी करने वाले ग्राहकों को 100 रुपये तक प्रोत्साहन देने के मुद्दे पर आज चर्चा की और एकल मासिक रिटर्न के लिए नये मॉडल तथा जीएसटीएन को सरकारी स्वामित्व वाली इकाई बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।परिषद ने कुछ राज्यों के विरोध को देखते हुए चीनी पर उपकर लगाने के बारे में फैसला टाल दिया। जीएसटी परिषद की 27वीं बैठक आज वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई। बैठक के बाद जेटली ने कहा कि कुछ अपवादों को छोड़कर सभी करदाताओं के महीने में एक ही जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की जरूरत होनी चाहिए। इस समय उन्हें मासिक स्तर पर कई रिटर्न दाखिल करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पंजीबद्ध व्यक्ति के कारोबार के आधार पर रिटर्न फाइलिंग तारीखें क्रमबद्ध होनी चाहिए ताकि आईटी प्रणाली पर भार का प्रबंधन किया जा सके। कंपोजिशन डीलर व शून्य लेनदेन वाले डीलरों को त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
वित्त सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि मासिक रिटर्न फाइल प्रणाली छह महीने में प्रभावी हो जाएगी तथा जीएसटीआर 3बी व जीएसटीआर1 फार्म के जरिए रिटर्न दाखिल करने की मौजूदा प्रणाली छह महीने से ज्यादा समय तक जारी नहीं रहेगी। खरीदारी का भुगतान डिजिटल माध्यम या चैक आदि से किए जाने पर प्रोत्साहन के मुद्दे पर परिषद के ज्यादातर राज्य कारोबार से उपभोक्ता (बी2सी) आपूर्ति पर जीएसटी दर (जहां दर तीन प्रतिशत या अधिक है) पर दो प्रतिशत रियायत देने के प्रस्ताव पर सहमत थे। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिए जाने के लिए इसके तहत अधिकतम 100 रुपये (प्रति भुगतान) प्रोत्साहन का प्रस्ताव है। लेकिन कुछ राज्य एक छोटी ‘निषेधात्मक सूची’ बनाए जाने के पक्ष में हैं। इसलिए इस मुद्दे को राज्यों के वित्तमंत्रियों के पांच सदस्यीय समूह के पास भेजा जाएगा।एक अन्य मंत्री समूह चीनी पर उपकर लगाने तथा एथेनाल पर जीएसटी में कटौती के मुद्दे पर विचार करेगा।जेटली ने कहा कि चीनी उत्पादन की लागत 35 रुपये प्रति किलो से अधिक है जबकि इसका बाजार मूल्य 26-28 रुपये प्रति किलो है। गन्ना उत्पादक गंभीर संकट में हैं और उपकर लगाने का प्रस्ताव उनकी मदद के लिए लाया गया है।
मंत्री के अनुसार चूंकि उपकर लगाने का यह प्रस्ताव जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद आया है इसलिए मंत्री समूह सुझाव देगा कि किसी जिंस की लागत उसके विक्रय मूल्य से अधिक होने की स्थिति में कोई समाधान जीएसटी प्रणाली के तहत कैसे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी में बदलने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। जीएसटी नेटवर्क, जीएसटी के लिए आईटी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाली कंपनी है। इसके तहत ‘निजी इकाइयों के स्वामित्व वाली 51% हिस्सेदारी सरकार खरीदेगी और अंतत: इस कंपनी में केंद्र सरकार की 50% जबकि राज्य सरकारों की संयुक्त रूप से 50% हिस्सेदारी होगी।’ जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) में इस समय भारत सरकार की हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत है। इतनी ही हिस्सेदारी सामूहिक रूप से सभी राज्य सरकारों की है। बाकी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी पांच निजी वित्तीय संस्थानों में है जिनमें एचडीएफसी लिमिटेड, एडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एनएसई स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट व एलआईसी हाउसिंग फिनांस की है।

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