हद होती है बेशर्मी की,डॉक्टर को पीटने वाले पदाधिकारी को बचाने में लगे हैं शिवगोपाल मिश्रा

लखनऊ।न तो आप इनसे नैतिकता की उम्मीद कीजिये और न मानवता की।यूनियन में पद क्या मिला,यह लोग आसमान में उड़ने लगते हैं। किससे कैसे पेश आना है इसकी उम्मीद आप इनसे मत कीजिये।रेलवे के इन तथाकथित शेरों के हौसले उस समय और बढ़ जाते है जब औधोगिक सम्बधों की खातिर बड़े अफसर चाह भी कुछ नहीं कर पाते हैं।शायद अब स्थितियों में बदलाव आना शुरू हुआ है तभी एनआरएमयू के एक ऐसे ही नेताजी को रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के आदेशों के बाद जम्मूकश्मीर के आखरी स्टेशन पर पोस्ट सहित ट्रांसफर कर दिया गया।इस पर रेलवे हॉस्पिटल के सहायक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के साथ हाथापाई करने का आरोप है। बेशर्मी की हद तो तब हो गई जब ऐसे उद्दंड कर्मचारी को बचाने के लिए एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा स्वयं पैरवी करते हुए रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्विनी लोहानी के पास पहुंच गए।सूत्रों ने रेलवार्ता को बताया कि वहां पर इनको दो टूक बता दिया गया कि ऐसे कर्मचारियों के प्रति कोई सहानभूति नही है।
लखनऊ कारखाना मंडल के ब्रांच प्रेजिडेंट मणिकांत शुक्ला ने न सिर्फ डॉक्टर के साथ धक्कामुक्की की बल्कि कथित रूप से उनको मारापीटा।मारपीट की घटना के बाद देशभर के रेलवे अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों में रोष फैल गया।आये दिन की इस दादागिरी के चलते वैसे भी डॉक्टरों में पहले से यूनियन नेताओं के प्रति तनाव फैला हुआ है।अधिकांश स्थानों में कर्मचारियों की आड़ में अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति इनके द्वारा की जा रही है।हाल ही में रेलवार्ता ने यूनियनों की इसी वसूली के खिलाफ रेल प्रशासन का ध्यान “यूनियनों की कमाई का अड्डा बने रेलवे हॉस्पिटल, चहेतों को कमाई की जगह पोस्टिंग कराने के लिए जोड़तोड़” शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
लखनऊ में हुई इस मारपीट की घटना ने साबित कर दिया कि यूनियन में पद मिलने के बाद सहनशीलता की उम्मीद इन पदाधिकारियों से करने की उम्मीद रखना पूरी तरह से बेमानी है।स्थिति उस वक़्त और दयनीय हो जाती है जब ऐसे लोगों को बचाने के लिए नेता सारी नैतिकता एक तरफ रख देते हैं। दरअसल इन्हें मालूम होता है कि आखिर में झुकना रेलवे के अधिकारियों को ही पड़ेगा। कोई यह पहला अवसर नही है जब यूनियन की आड़ में डॉक्टरों को मारापीटा गया। कई बार अधिकारियों के साथ भी मारपीट की गई।लेकिन यह दुर्भाग्य ही रहा कि कभी डीआरएम तो कभी जीएम तो कभी रेलवे बोर्ड से ऐसे उद्दंड नेताओं को ससम्मान बरी किया गया।दरअसल नेता अधिकारी के इस गठजोड़ में अभी तक “हमाम में सब नंगे” वाली कहावत पूरी तरह से सही साबित होती आई है।
सम्भवतः पहली बार रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने पहली बार अपनी शक्तियों का सीधा इस्तेमाल करते हुए ऐसे नेता को पोस्ट सहित जम्मूकश्मीर के आखरी स्टेशन बडगाम में पोस्ट कर दिया।साथ ही उन्होंने अधिकारियों को सख्त ताकीद दी कि ऐसे नेताओं के खिलाफ 14/2 के तहत कार्रवाई करके उन्हें नोकरी से बर्खास्त कर दिया जाए।
यूनियन की आड़ में मारपीट करने को कतई जायज नही ठहराया जा सकता है।यदि अधिकारी बात नही मान रहे हैं तब आप सम्बंधित अधिकारी की जिंदाबाद-मुर्दाबाद कर सकते है,प्रदर्शन कर सकते है लेकिन आप किसी भी हालत में किसी के साथ मारपीट नहीं कर सकते हैं। शर्मनाक तो यह है कि ऐसे नेता को बचाने के लिए एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा स्वंय रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के पास गुहार लगाने पहुंच जाते है।ऐसा करते हुए उन्हें शर्म भी नहीं आती है। आखिर कब यूनियन की आड़ में हो रही इस गुंडागर्दी को रोका जाएगा। जहां तक इस मामले का सवाल है एक बार फिर पिटने के बाबजूद अधिकारियों को ही पीछे हटना पड़ेगा। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है।फिलहाल मारपीट करने वाले नेताजी को केट से 24 अगस्त तक ट्रांसफर पर राहत मिल गई है।

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2 comments

  1. हवा में उड़ रहे हो पत्रकार महोदय जी जब अफसरों के द्वारा ट्रैक मैन आत्महत्या करता है या नहीं सुना आपने या नहीं छापने की हिम्मत है लोको पायलट जिस रेल की पटरी में शिद्दत से ट्रेन दौड़ाता है उसी पटरी में सर रखकर आत्महत्या कर ली यह जानकारी में नॉलेज में नहीं आया पढ़े लिखे कम है यह छापने की हिम्मत नहीं है इन अफसरशाही जंजीरों में आज भी हम भारतीय स्वतंत्रता की आजादी के बाद भी जकड़े हुए हैं
    बैंक में अफसरों के बंगलों में कार्य करने को मजबूर हैं 14 घंटे 16 घंटे रेल कर्मचारी ड्यूटी करने में मजबूर हैं या नहीं दिखाई देता आपको BSF के जवानों के साथ स्वतंत्रता दिवस तो यह राजनेता मनाएंगे लेकिन BSF के सिपाहियों को पेंशन नहीं मिलती है इस बात का जिक्र ना कोई मीडिया करेगा ना कोई पत्रकार करेगा क्योंकि सब के सब बिकाऊ हो गए

    • आज तक का मेरा व्यक्तिगत कथन है किसी पत्रकार ने न्यू पेंशन स्कीम के खिलाफ ना बोला है ना बोलेगा जब टीवी चैनलों को हमारी आपकी जरूरत होती है तभी वह आते हैं नहीं तो किनारे कर दिया जाता है

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